रमजान में रोजन मियां का जगाना रमजान का महीना आते ही पहाड़ी टोला बानो मंजिल रोड निवासी रोजन मियां की याद आ जाती है सन 1970-80 के दशक में रोजन मियां जिन्हे बच्चे बूढ़े प्यार से रोजना चाचा कहा करते थे पूरे रमजान के महीने में रात 2:00 बजे से रोजगारों को सेहरी के लिए जगाया करते थे रोजन मियां का व्यक्तित्व ही निराला था नाटा कद, सर में पगड़ी और हाथ में लाठी लिए रात 2:00 बजे घर से निकल पड़ते और रोजगारों को नात और हमद पढ़कर जगाया करते थे उनकी सुरीली आवाज सुन रोजेदार गहरी नींद से उठ जाया करते थे बीच-बीच में अपनी लाठी से लोगों का दरवाजा भी पीटा करते थे ताकि रोजेदार उठ जाए उस समय रांची की आबादी बहुत कम थी मुस्लिम बहुत क्षेत्र पहाड़ी टोला, राजा हाथा, भुईया टोली, प्यादा टोली, पुरानी रांची बस्तियों का यह पैदल मार्च किया करते थे और लोगों को जगाया करते थे उस समय कोई वाद्य यंत्र नहीं था पूरे रमजान के महीना में रोज़ेदारों को जगाने के बाद ईद के दिन हरमू स्थित ईदगाह में रोजना चाचा चादर बिछा कर बैठ जाते थे और नमाजी इन्हें उनकी सेवा के बदले आर्थिक सहयोग किया करते थे जिसे नजराना कहते हैं रोजन मियां की मृत्यु के बाद भी उनके द्वारा चलाई गई परंपरा निरंतर चलती रही मोहल्ला के कुछ युवाओं द्वारा वाद्य यंत्र के माध्यम से लोगों को जगाया जाने लगा लेकिन रोजन मियां की सुरीली आवाज़ के सामने यह फीका रहा आज भी रोजन मियां की आवाज कानों में गूंजती रहती है l रोजन मियां के वह पंक्ति आज भी लोगों को याद है जिसके बोल थे- जिसने रख करके तोड़ेगा रोजा, उसके सर पर है कयामत का बोझा ll प्रस्तुति- महबूब आलम