राफिया नाज़ के बयान पर आलोक कुमार दूबे का पलटवार, बोले— कब्रिस्तान की बाउंड्री और बच्चों का भविष्य दोनों जरूरी
*अल्पसंख्यकों पर राजनीति करने से पहले भाजपा अपने शासनकाल का हिसाब दे: आलोक कुमार दूबे*
*शिक्षा और रोजगार पर भाजपा बताए अपना ठोस विजन, केवल आरोप लगाने से नहीं होगा समस्याओं का समाधान: आलोक दूबे*
*कब्रिस्तान की बाउंड्री को बच्चों के भविष्य से जोड़ना अनुचित, भाजपा समाज को गुमराह करना बंद करे: आलोक कुमार दूबे*
*अल्पसंख्यक समाज किसी दल की जागीर नहीं, उसे बयानबाजी नहीं ठोस काम चाहिए: आलोक कुमार दूबे*
रांची: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने भाजपा प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज़ के बयान पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा को अल्पसंख्यक समाज के बच्चों के भविष्य की इतनी ही चिंता है, तो पहले अपनी राजनीति का आईना देखना चाहिए। कब्रिस्तान की बाउंड्री का निर्माण और बच्चों की शिक्षा, दोनों ही समाज की जरूरतें हैं। एक के महत्व को कम करके दूसरे के नाम पर राजनीति करना भाजपा की संकीर्ण सोच को दर्शाता है।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि कब्रिस्तान की बाउंड्री का निर्माण किसी समुदाय के प्रति उपेक्षा का नहीं, बल्कि उसकी सुरक्षा, सम्मान और सामाजिक आवश्यकता से जुड़ा विषय है। धार्मिक और सामाजिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। इसे जिंदा बच्चों के भविष्य पर ताला लगाने की संज्ञा देना न केवल अनावश्यक राजनीतिक बयानबाजी है, बल्कि समाज की वास्तविक जरूरतों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करने की कोशिश भी है।
उन्होंने कहा कि भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता को अल्पसंख्यक समाज की चिंता जताने से पहले यह बताना चाहिए कि केंद्र में भाजपा की सरकार रहते हुए अल्पसंख्यक समुदाय के शैक्षणिक, आर्थिक और रोजगार संबंधी मुद्दों पर क्या ठोस पहल की गई। केवल राज्य सरकार पर सवाल उठाकर अपनी राजनीतिक जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता। अल्पसंख्यक समाज को राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और सम्मान के समान अवसर चाहिए।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति, मदरसा बोर्ड का गठन, शिक्षकों के लंबित वेतन और अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम की कार्यप्रणाली जैसे मुद्दे निश्चित रूप से गंभीर हैं। इन पर सरकार से सवाल पूछना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन इन विषयों को लेकर समाधान की मांग करने के बजाय पूरे समाज को लेकर भ्रामक और भावनात्मक बयान देना उचित नहीं है। इन मुद्दों पर तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए और संबंधित विभागों से जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि भाजपा को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि वह अल्पसंख्यक समाज के विकास के लिए कौन-सी ठोस नीतियां और योजनाएं सामने रख रही है। केवल कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा पर आरोप लगाने से बच्चों को शिक्षा नहीं मिलेगी, युवाओं को रोजगार नहीं मिलेगा और शिक्षकों की समस्याओं का समाधान नहीं होगा। जनता को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाला काम चाहिए।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि कांग्रेस की विचारधारा सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता और सभी समुदायों को समान अवसर देने पर आधारित है।
उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि समाज को बांटकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश बंद होनी चाहिए। कब्रिस्तान की बाउंड्री हो या बच्चों के लिए बेहतर स्कूल, शिक्षकों की नियुक्ति हो या युवाओं के लिए रोजगार—हर मुद्दा महत्वपूर्ण है। विकास के एक कार्य को दूसरे के विरोध में खड़ा करना समझदारी नहीं, बल्कि राजनीतिक अवसरवाद है।
आलोक कुमार दूबे ने कहा कि झारखंड की जनता जानती है कि भावनात्मक मुद्दे उठाना आसान है, लेकिन जनता की वास्तविक समस्याओं का समाधान करना ही असली राजनीति है। भाजपा को आरोप लगाने की राजनीति छोड़कर सकारात्मक सुझाव देने चाहिए। अल्पसंख्यक समाज किसी भी दल की जागीर नहीं है और न ही उसे राजनीतिक बयानबाजी का माध्यम बनाया जाना चाहिए। समाज के बच्चों का भविष्य सुरक्षित करना और प्रत्येक नागरिक को सम्मान के साथ जीने का अवसर देना ही लोकतंत्र की असली कसौटी है।