गोपाल शर्मा
झारखण्ड/ साहेबगंज
जिला प्रशासन साहिबगंज के तत्वावधान में आज सिद्धो कान्हू सभागार में एक महत्वपूर्ण जिला स्तरीय उनमुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सरकारी सेवकों के लिए आवश्यक स्थापना संबंधी नियम, सेवा पुस्तिका (Service Book) का अनुरक्षण एवं अवकाश संबंधी प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी हेमंत सती ने की।

कार्यक्रम का उद्देश्य
जिला स्थापना उपसमाहर्ता झुन्नु कुमार मिश्रा ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा समय-समय पर इस प्रकार के प्रशिक्षण एवं उनमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, ताकि अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सेवा नियमों की अद्यतन जानकारी मिल सके।
उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, दक्षता एवं समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए यह आवश्यक है कि प्रत्येक कार्मिक को झारखंड सेवा संहिता एवं बिहार सेवा संहिता से अपनाए गए प्रावधानों की पूर्ण जानकारी हो और अपने दायित्वों का निर्वहन उसी के अनुरूप करें।

अवकाश संबंधी प्रावधान
कार्यक्रम की शुरुआत में अवकाश से जुड़े नियमों पर विस्तृत चर्चा की गई। प्रस्तुति के माध्यम से अधिकारियों को यह जानकारी दी गई कि –
चिकित्सीय अवकाश (Medical Leave) तभी स्वीकृत होगा जब कर्मचारी विधिवत चिकित्सकीय प्रमाणपत्र प्रस्तुत करेगा।
स्वीकृति प्राप्त किए बिना दीर्घकालिक अवकाश पर जाने वाले कर्मचारी वेतन एवं अन्य सेवा लाभ से वंचित हो सकते हैं।
अर्जित अवकाश (Earned Leave), अर्ध वेतन अवकाश (Half Pay Leave), अध्ययन अवकाश (Study Leave) एवं विशेष अवकाश (Special Leave) से जुड़े नियमों की जानकारी विस्तार से दी गई।
यह भी स्पष्ट किया गया कि निर्धारित सीमा से अधिक अवकाश स्वीकृत नहीं होगा और इसका सीधा प्रभाव कर्मचारी के पेंशन लाभ पर पड़ेगा।
उपायुक्त हेमंत सती ने कहा “अवकाश लेना प्रत्येक कर्मचारी का अधिकार है, लेकिन इसे नियमसम्मत तरीके से ही प्रयोग करना चाहिए। अधिकार और दायित्व, दोनों ही सेवा नियमों से संचालित होते हैं।”

सेवा पुस्तिका (Service Book) का अनुरक्षण
इसके बाद सेवा पुस्तिका पर चर्चा हुई। अधिकारियों को बताया गया कि –
प्रत्येक सरकारी कर्मचारी की नियुक्ति से सेवानिवृत्ति तक की संपूर्ण प्रविष्टियाँ सेवा पुस्तिका में दर्ज करना अनिवार्य है।
इसमें नियुक्ति की तिथि, पदोन्नति, स्थानांतरण, वेतनमान, वेतन वृद्धि, दंड, निलंबन, पुनःस्थापन आदि विवरणों का समय-समय पर अद्यतन होना आवश्यक है।
यदि सेवा पुस्तिका का सही अनुरक्षण नहीं होगा, तो भविष्य में पेंशन, पदोन्नति, एसीपी/एमएसीपी लाभ प्राप्त करने में जटिलताएँ आ सकती हैं।
सेवा पुस्तिका में किसी भी प्रकार का संशोधन केवल सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से ही संभव है।
उपायुक्त ने निर्देश दिया कि किसी भी परिस्थिति में सेवा पुस्तिका का अद्यतन कार्य लंबित नहीं रहना चाहिए।

स्थापना संबंधी नियम
कार्यक्रम में स्थापना शाखा से जुड़े कई बिंदुओं पर मार्गदर्शन दिया गया –
सेवा पुष्टि (Confirmation in Service) : प्रारंभिक सेवा अवधि पूरी होने के बाद पुष्टि की प्रक्रिया अनिवार्य है।
एसीपी/एमएसीपी (ACP/MACP) : पदोन्नति समय पर नहीं मिलने पर कर्मचारियों को वित्तीय लाभ प्रदान करने की व्यवस्था है, जिसके लिए वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (APAR) का अद्यतन आवश्यक है।
अनुशासनात्मक कार्यवाही : नियम उल्लंघन की स्थिति में झारखंड सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2016 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
स्थानांतरण एवं प्रतिनियुक्ति : स्थानांतरण प्रक्रिया को पारदर्शी एवं नियमानुसार बनाने पर बल दिया गया।
पंजी संधारण एवं कार्यालयीन कार्यप्रणाली
इस अवसर पर कार्यालय अधीक्षक मेथियस बेसरा ने विभिन्न पंजी संधारण एवं रखरखाव से संबंधित जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि पंजी, नाजीर रशीद, रोकड़ बही, भंडार पंजी आदि का नियमित अद्यतन और संधारण सरकारी कार्यप्रणाली को सुचारु रखने के लिए आवश्यक है।
उपायुक्त का संदेश
अपने संबोधन में उपायुक्त हेमंत सती ने कहा “सरकारी सेवाओं में कार्यरत प्रत्येक कर्मचारी का यह दायित्व है कि वह अपने सेवा अभिलेख को पारदर्शी एवं अद्यतन बनाए रखे। अवकाश, स्थानांतरण, पदोन्नति और सेवा पुस्तिका का रखरखाव – हर स्तर पर नियमों का पालन होना चाहिए। जब नियमों का अनुपालन होगा तभी सुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित हो पाएगी।”
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से परियोजना निदेशक आईटीडीए संजय कुमार दास, सिविल सर्जन रामदेव पासवान, अनुमंडल पदाधिकारी अमर जॉन आईन्द, जिला परिवहन पदाधिकारी मिथिलेश कुमार चौधरी, जिला योजना पदाधिकारी अनूप कुमार, जिला आपूर्ति पदाधिकारी झुन्नू कुमार मिश्रा सहित विभिन्न जिला स्तरीय अधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचल अधिकारी, अनुभाग पदाधिकारी, कार्यालय अधीक्षक, प्रधान लिपिक, शाखा प्रभारी, लिपिक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।