गोपाल शर्मा
झारखण्ड/ साहेबगंज
जिला स्तरीय अभिसरण योजना की प्रगति की समीक्षा हेतु उपायुक्त हेमंत सती की अध्यक्षता में आज कार्यालय प्रकोष्ठ में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों की योजनाओं की अद्यतन स्थिति पर चर्चा की गई तथा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए गए।
बैठक के दौरान पशुपालन, भूमि संरक्षण, आत्मा, लघु सिंचाई, उद्यान, कृषि, जलछाजन, मत्स्य, सहकारिता, गव्य विकास, झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS), NABARD एवं ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (R-SETI) से संबंधित योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।

पशुपालन एवं भूमि संरक्षण विभाग की समीक्षा
पशुपालन विभाग की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने बकरी, कुक्कुट एवं बत्तख चुजा वितरण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से ग्रामीण परिवारों को रोजगार और आजीविका के बेहतर अवसर मिल सकते हैं। भूमि संरक्षण विभाग से संबंधित योजनाओं की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने प्रकुलेशन टैंक, तालाब निर्माण एवं जल संचयन कार्यों की जानकारी ली। साथ ही अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्य पूर्ण करने का निर्देश दिया।
सहकारिता, कृषि एवं उद्यान विभाग पर जोर
सहकारिता विभाग द्वारा 100 एमटी एवं 500 एमटी क्षमता वाले गोदाम निर्माण की प्रगति पर भी विस्तार से चर्चा हुई। उपायुक्त ने इस परियोजना को किसानों के लिए भंडारण क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताते हुए कार्यों को गति देने को कहा। कृषि, उद्यान, गव्य विकास एवं आत्मा परियोजना से संबंधित गतिविधियों पर चर्चा करते हुए उपायुक्त ने कहा कि किसानों को उन्नत तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज एवं आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने कहा कि किसानों को सशक्त बनाकर ही आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था का निर्माण संभव है।

बैठक में उप विकास आयुक्त सतीश चंद्रा, जिला कृषि पदाधिकारी प्रमोद एक्का, जिला भूमि संरक्षण पदाधिकारी राहुल गुप्ता, जिला मत्स्य पदाधिकारी वीरेन्द्र विन्हा, जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. दिनेश कुमार सिंह, जिला उद्यान पदाधिकारी अमितेश रंजन, जिला सहकारिता पदाधिकारी महादेव मुर्मू, JSLPS के डीपीएम मतिन तारीक, NABARD एवं R-SETI के प्रतिनिधि सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक के समापन पर उपायुक्त हेमंत सती ने कहा कि “विभागीय समन्वय और सतत निगरानी ही विकास का मूल मंत्र है। योजनाओं को धरातल पर उतारते हुए ग्रामीणों को स्वरोजगार एवं आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना हम सबकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।”