गोपाल शर्मा
झारखंड/ साहेबगंज
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए साहिबगंज में लखपति दीदी सम्मान सह परिसंपत्ति वितरण समारोह का भव्य आयोजन किया गया। भूमि संरक्षण कार्यालय साहेबगंज एवं झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले की हजारों महिलाएँ शामिल हुईं।

सिद्धो-कान्हू सभागार में आयोजित इस समारोह का शुभारंभ पारंपरिक तरीके से दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। दीप प्रज्ज्वलन का कार्य जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त हेमंत सती ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। उनके साथ उप विकास आयुक्त सतीश चंद्रा, जिला कृषि पदाधिकारी प्रमोद एक्का, जिला सहकारिता पदाधिकारी महादेव मुर्मू, जिला मत्स्य पदाधिकारी विरेंद्र विन्हा, JSLPS के जिला परियोजना प्रबंधक मतीन तारीक, जिला उद्यान पदाधिकारी अमितेश रंजन एवं भूमि संरक्षण पदाधिकारी राहुल गुप्ता उपस्थित रहे।

उपायुक्त ने महिलाओं से आत्मनिर्भरता की अपील
अपने संबोधन में उपायुक्त हेमंत सती ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल सम्मान देना ही नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि जिले की प्रत्येक महिला अपनी मासिक आय को बढ़ाकर “लखपति दीदी” के रूप में उभर सके। उन्होंने कहा कि महिलाएँ अगर अपने कार्यों में विविधता (Diversification) लाएँगी, तो उनकी आमदनी और अवसर दोनों ही बढ़ेंगे।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई महिला सिलाई का कार्य कर रही है, तो वह इसके साथ कृषि, पशुपालन या बागवानी जैसे अन्य कार्य भी जोड़ सकती है, जिससे अतिरिक्त आय का स्रोत बनेगा। उपायुक्त ने जानकारी दी कि सरकार की 150 से अधिक योजनाओं के माध्यम से बकरी पालन, मुर्गी पालन, सूअर पालन, मधुमक्खी पालन, तालाब निर्माण, मछली व बत्तख पालन, सब्ज़ी बीज वितरण एवं दलहन खेती जैसी सुविधाएँ निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि जिले में मौजूद सभी विभागीय अधिकारी इस दिशा में हर संभव मदद देने के लिए तत्पर हैं।
साहिबगंज राज्य में सबसे आगे
उप विकास आयुक्त सतीश चंद्रा ने अपने संबोधन में कहा कि साहिबगंज पूरे झारखंड में लखपति दीदी तैयार करने के मामले में सबसे आगे है। जिले में अब तक 25,000 लखपति दीदियाँ तैयार हो चुकी हैं, जो राज्य में एक मिसाल है। उन्होंने बताया कि जिले के 1,43,000 से अधिक परिवारों को सरकार एवं JSLPS के माध्यम से जोड़ा गया है और उन्हें प्रशिक्षण, स्किल डेवलपमेंट तथा बैंक लिंकेज की सुविधा दी जा रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि ये महिलाएँ न केवल खेती और गैर-खेती आधारित उद्यमों में सफलता प्राप्त कर रही हैं, बल्कि सामाजिक कुरीतियों जैसे हरिया दारु की परंपरा और डायन प्रथा जैसी कुप्रथाओं को समाप्त करने में भी योगदान दे रही हैं। सरकार द्वारा इस दिशा में काम कर रही महिलाओं को ₹50,000 का करमुक्त अनुदान भी दिया जा रहा है, ताकि वे वैकल्पिक रोजगार अपना सकें और सामाजिक बदलाव की प्रेरणा बनें।

समारोह में विभिन्न प्रखंडों की लखपति दीदी समूहों को परिसंपत्ति वितरित की गई। बोरियो, राजमहल, बरहेट, बड़हरवा एवं तालझारी प्रखंड की 09 लखपति दीदी समूहों को मिनी ट्रैक्टर सौंपे गए। उत्कृष्ट कार्य करने वाले विभागीय कर्मियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। परिसंपत्ति वितरण के अंतर्गत VRF के तहत ₹1.90 करोड़, RF के तहत ₹0.87 करोड़, CIF के तहत ₹3.00 करोड़ तथा PG Fund के तहत ₹0.10 करोड़ का वितरण किया गया।साथ ही चयनित लखपति दीदियों, BPMs, CCs, IPRPs एवं कैडर्स को भी प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।

समारोह का सबसे प्रेरणादायक पल तब आया, जब दो लखपति दीदियों ने मंच से अपनी सफलता की कहानियाँ साझा कीं। उनकी जीवन यात्रा, कठिनाइयों पर विजय और आत्मनिर्भरता की मिसाल ने पूरे सभागार को उत्साहित कर दिया। उपस्थित महिलाएँ उनकी बातों से प्रभावित होकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित हुईं।

यह कार्यक्रम केवल परिसंपत्ति वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण का नया अध्याय साबित हुआ। उपायुक्त एवं अन्य अधिकारियों ने महिलाओं को सरकार की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने और आत्मनिर्भर भारत निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
