गोपाल शर्मा
झारखण्ड/ साहेबगंज
जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के आदि कर्मयोगी अभियान के अंतर्गत आज साहिबगंज जिले में तीन दिवसीय जिला प्रक्रिया प्रयोगशाला का भव्य शुभारंभ हुआ। जिला मुख्यालय स्थित सिद्धो कान्हू सभागार इस अवसर पर प्रशिक्षण, विचार-विमर्श और अनुभव साझा करने का प्रमुख केंद्र बना। इस आयोजन में जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए विभागीय प्रतिनिधियों, पंचायत स्तरीय पदाधिकारियों तथा अभियान से जुड़े कार्मिकों ने भाग लिया।

प्रशिक्षण का उद्देश्य और महत्व
इस प्रयोगशाला का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को जमीनी स्तर पर नेतृत्व कौशल, योजनाओं के समन्वय की जानकारी, शिकायत निवारण प्रणाली तथा सहभागी विकास की प्रक्रिया से अवगत कराना है। इसके माध्यम से अभियान की प्रभावी रूपरेखा तैयार कर प्रत्येक प्रखंड एवं ग्राम पंचायत तक पहुँचाना सुनिश्चित किया जाएगा।

परियोजना निदेशक, आईटीडीए (एकीकृत जनजातीय विकास अभिकरण) संजय कुमार दास ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि भविष्य में जनहित आधारित सशक्त ढाँचा खड़ा करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने बताया कि इस तीन दिवसीय जिला प्रक्रिया प्रयोगशाला से प्रशिक्षित होने वाले अधिकारियों को आगे चलकर प्रखंड मुख्य प्रशिक्षक बनाया जाएगा। ये मुख्य प्रशिक्षक अपने-अपने क्षेत्रों में ग्राम स्तर के कार्यकर्ताओं, पंचायत प्रतिनिधियों और अग्रिम पंक्ति के कार्मिकों को प्रशिक्षित करेंगे, जिससे योजनाओं और सेवाओं का लाभ हर पात्र परिवार तक पहुँचे।

‘परिवर्तन की सर्पिल प्रक्रिया’ पर विशेष फोकस
इस प्रयोगशाला के दौरान प्रतिभागियों को अभियान की ‘परिवर्तन की सर्पिल प्रक्रिया’ से अवगत कराया जाएगा। इसमें छह चरण शामिल हैं जागरूकता, सशक्तिकरण, कार्रवाई, अनुकरणीय उदाहरण, संस्थानीकरण, विस्तार
इन चरणों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि विकास योजनाएँ केवल कागज़ पर न रहकर, धरातल पर समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।
विजन योजना 2030 और आदि सेवा केंद्र
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को यह भी बताया जाएगा कि किस प्रकार प्रत्येक गाँव के लिए विजन योजना 2030 तैयार की जाएगी। इस योजना के तहत गाँवों की दीर्घकालिक विकास आवश्यकताओं को चिह्नित कर समाधानात्मक कार्ययोजनाएँ बनाई जाएंगी। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक गाँव में आदि सेवा केंद्र की स्थापना की जाएगी, जो शिकायत निवारण और सेवा उपलब्ध कराने का एकल केंद्र बनेगा। इससे ग्रामीणों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी और उन्हें सभी सेवाएँ गाँव के स्तर पर ही प्राप्त होंगी।

पहले दिन का कार्यक्रम और आगे की रूपरेखा
प्रथम दिवस पर प्रतिभागियों को अभियान की मूल अवधारणा, राष्ट्रीय दृष्टिकोण और आदिवासी समुदायों की भागीदारी से विकसित भारत 2047 के संकल्प की जानकारी दी गई। आगामी दो दिनों में उन्हें व्यावहारिक अभ्यास, समूह कार्यशालाएँ, अध्ययन प्रसंग और मैदानी अनुकरण जैसी गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। यह सभी प्रक्रियाएँ उन्हें जमीनी स्तर पर योजनाओं को लागू करने और स्थानीय समुदायों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने में मदद करेंगी।
पारदर्शिता और उत्तरदायित्व की दिशा में कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रयोगशाला केवल ज्ञान विनिमय और क्षमता निर्माण का मंच ही नहीं है, बल्कि यह जिला प्रशासन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने का आधार भी बनेगी। जब प्रत्येक प्रखंड और गाँव स्तर पर प्रशिक्षित कार्यकर्ता और प्रतिनिधि अपनी जिम्मेदारियाँ निभाएँगे, तब शासन की योजनाएँ वास्तव में आमजन तक पहुँच पाएँगी।
अंतिम दिवस पर कार्ययोजना तैयार होगी
तीन दिवसीय प्रयोगशाला के अंतिम दिवस पर एक जिला स्तरीय कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसमें प्रखंड और ग्राम स्तर पर कार्यान्वयन की स्पष्ट रूपरेखा सम्मिलित होगी। इस कार्ययोजना के आधार पर आगामी महीनों में प्रखंड अभिमुखीकरण कार्यक्रम तथा ग्राम कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा।
इस कार्ययोजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विकसित भारत 2047 का संकल्प केवल नारा न रहकर, साहिबगंज जिले के प्रत्येक आदिवासी समुदाय की वास्तविकता बने।