प्रत्येक कार्डधारी से 50 रुपये वसूली, चावल-दाल और नमक में कटौती का आरोप; एमओ को सौंपा सामूहिक आवेदन
उधवा, संवाददाता।
उधवा प्रखंड क्षेत्र के दक्षिण सरफराजगंज पंचायत स्थित मनिहारीटोला स्वयं सहायता समूह द्वारा संचालित जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) दुकान एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। राशन कार्डधारियों ने डीलर और समूह के सदस्यों पर राशन वितरण में धांधली, निर्धारित मात्रा से कम खाद्यान्न देने तथा अवैध वसूली करने का गंभीर आरोप लगाया है। मामले को लेकर शनिवार को दर्जनों लाभुकों ने संयुक्त हस्ताक्षरयुक्त आवेदन प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (एमओ) अमर कुमार को सौंपते हुए निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की।

शिकायतकर्ताओं के अनुसार दक्षिण सरफराजगंज पंचायत अंतर्गत मनिहारीटोला स्वयं सहायता समूह की डीलर फुल कुमारी देवी (मृतक) के नाम पर संचालित पीडीएस दुकान का संचालन वर्तमान में उनके पति डोमेन मंडल तथा समूह की सदस्य पूनम देवी, शेफाली देवी, आरती देवी, ममता देवी समेत अन्य सदस्य कर रहे हैं। लाभुकों का आरोप है कि राशन वितरण के दौरान नियमों की अनदेखी कर उपभोक्ताओं के साथ मनमानी की जाती है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रत्येक राशन कार्डधारी से प्रति माह 50 रुपये की अवैध वसूली की जाती है। इसके अलावा खाद्यान्न वितरण में भी बड़े पैमाने पर कटौती की जा रही है। लाभुकों के मुताबिक प्रति यूनिट चावल में लगभग 500 ग्राम तक की कमी की जाती है, जबकि प्रति पैकेट दाल में करीब 100 ग्राम कम दिया जाता है। इतना ही नहीं, सरकार द्वारा निर्धारित तीन पैकेट नमक के स्थान पर केवल दो पैकेट ही उपलब्ध कराए जाते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजना का लाभ पाने के लिए वे पूरी तरह पीडीएस प्रणाली पर निर्भर हैं, लेकिन राशन सामग्री में लगातार की जा रही कटौती से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि गरीब परिवारों के हिस्से का खाद्यान्न व्यवस्थित तरीके से नहीं दिया जा रहा, जिससे उनके सामने खाद्य सुरक्षा का संकट उत्पन्न हो रहा है।
शिकायत पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि डीलर एवं समूह के कुछ सदस्यों का व्यवहार उपभोक्ताओं के प्रति उचित नहीं है। यदि कोई लाभुक राशन में कटौती या अतिरिक्त राशि वसूली का विरोध करता है तो उसे राशन बंद कर देने अथवा राशन कार्ड से नाम हटवा देने की धमकी दी जाती है। इससे कई लाभुक भय के कारण खुलकर विरोध नहीं कर पाते।
आवेदन में लाभुकों ने यह भी आरोप लगाया कि डीलर द्वारा अक्सर यह कहा जाता है कि उन्हें “नीचे से ऊपर तक” विभिन्न स्तरों पर पैसा देना पड़ता है, इसलिए कार्डधारियों से अतिरिक्त राशि ली जाती है। इतना ही नहीं, शिकायतकर्ताओं का कहना है कि डीलर अपने प्रभाव का हवाला देते हुए दावा करती हैं कि उनके खिलाफ शिकायत करने से कोई कार्रवाई नहीं होगी क्योंकि उनकी पहुंच उच्च अधिकारियों तक है।
मामले के सार्वजनिक होने के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल है। ग्रामीणों और लाभुकों ने प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने, अवैध वसूली पर रोक लगाने तथा सभी कार्डधारियों को निर्धारित मात्रा में राशन उपलब्ध कराने की मांग की है।
इस संबंध में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (एमओ) उधवा अमर कुमार ने बताया कि राशन कार्डधारियों द्वारा संयुक्त आवेदन प्राप्त हुआ है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कराई जाएगी। यदि जांच के दौरान आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित डीलर एवं जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल ग्रामीणों की निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं। लाभुकों को उम्मीद है कि जांच के माध्यम से सच्चाई सामने आएगी और जन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए गरीबों को उनका पूरा हक दिलाया जाएगा।