गोपाल शर्मा
झारखंड/ साहिबगंज।
झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, रांची के निर्देशानुसार शुक्रवार को व्यवहार न्यायालय परिसर स्थित लोक अदालत कक्ष में जिला स्तरीय मोटर दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का नेतृत्व प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष श्री अखिल कुमार के मार्गदर्शन में किया गया।

कार्यक्रम में जिले के सभी थाना प्रभारी, अनुसंधानकर्ता, चिकित्सक, परिवहन विभाग के अधिकारी एवं संबंधित विभागों के पदाधिकारी शामिल हुए।
पीड़ित परिवार को समय पर मुआवजा दिलाना पुलिस की जिम्मेदारी – न्यायालय
कार्यशाला को संबोधित करते हुए कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश श्री संजय कुमार उपाध्याय ने कहा कि मोटर दुर्घटना के मामलों में थाना प्रभारी एवं पुलिस अधिकारियों का यह नैतिक एवं कानूनी दायित्व है कि पीड़ित परिवार को शीघ्र और उचित मुआवजा मिल सके।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इस प्रक्रिया में लापरवाही बरतने पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि—
दुर्घटनाग्रस्त वाहनों के कागजातों की जाँच जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) से कराना अनिवार्य है।
दुर्घटना के उपरांत पुलिस अधिकारी को बीमा कंपनी को सूचित करना होगा।
समय पर जांच रिपोर्ट व आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करना तथा वैध स्वीकृति प्रदान करना आवश्यक है।
श्री उपाध्याय ने कहा कि मुआवजे का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता नहीं बल्कि पीड़ित परिवार के जीवनयापन और रोजगार के साधन सुनिश्चित करना है।
30 दिनों के भीतर प्रस्तुत हों दस्तावेज : न्यायाधीश
जिला न्यायाधीश सह अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश तृतीय श्री शेखर कुमार ने मोटर दुर्घटना कानूनों में हुए हालिया संशोधनों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सड़क दुर्घटना के 30 दिनों के भीतर पुलिस को सभी संबंधित कागजात न्यायालय में प्रस्तुत करना अनिवार्य है। यदि किसी कारणवश दस्तावेज प्रस्तुत नहीं हो पाते, तो इसकी सूचना तत्काल न्यायालय को देनी होगी।
उन्होंने थाना प्रभारियों से अपेक्षा जताई कि वे जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ कार्य करें ताकि पीड़ितों को न्याय में देरी न हो।
अब E-DAR ऑनलाइन भरना अनिवार्य
पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) श्री विजय कुशवाहा ने कहा कि अब प्रत्येक अनुसंधानकर्ता (Investigating Officer) को E-DAR पोर्टल पर दुर्घटना संबंधी जानकारी ऑनलाइन भरना अनिवार्य है। उन्होंने इस प्रक्रिया की पूरी तकनीकी जानकारी दी और अधिकारियों को इसे गंभीरता से लागू करने का निर्देश दिया।
सड़क सुरक्षा उपाय एवं हिट एंड रन मुआवजा योजना
सड़क सुरक्षा अधिकारी श्री नीरज कुमार ने सड़क पर चलते समय अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपायों की जानकारी दी। साथ ही उन्होंने हिट एंड रन मामलों में पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिलाने की विस्तृत प्रक्रिया समझाई।
कार्यशाला में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी श्री सिंधु नाथ लमाये, सचिव श्री विश्वनाथ भगत, पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) श्री विजय कुशवाहा, सड़क अभियंता, आईटी सहायक समेत जिलेभर के पुलिस अधिकारी एवं पदाधिकारी उपस्थित थे।
