15 वें वित्त आयोग, पीएम-आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की योजनाओं की हुई बिंदुवार समीक्षा
गोपाल शर्मा
झारखंड/ पाकुड़।
उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में जिला समन्वय समिति (DLC) की बैठक समाहरणालय सभागार में आयोजित की गई। बैठक में 15 वें वित्त आयोग, प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (PM-ABHIM) तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत संचालित विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक के दौरान जिला प्रशासन की ओर से योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसमें बताया गया कि 15वें वित्त आयोग के तहत कुल 22 स्वास्थ्य उपकेंद्रों की स्वीकृति दी गई है।
स्वीकृत योजनाओं की स्थिति वर्षवार समीक्षा
- वित्तीय वर्ष 2021-22 में 6 स्वास्थ्य उपकेंद्रों की स्वीकृति दी गई, जिनमें से 5 में कार्य प्रारंभ हो चुका है, जबकि 1 योजना शेष है।
- वित्तीय वर्ष 2022-23 में 10 योजनाएँ स्वीकृत की गईं, जिनमें 5 में कार्य प्रारंभ हुआ है तथा 5 योजनाएँ लंबित हैं।
- वित्तीय वर्ष 2023-24 में 6 योजनाएँ स्वीकृत हुई हैं, जिनमें 3 में कार्य प्रारंभ किया गया है, जबकि 3 कार्य लंबित हैं।
बैठक में यह भी बताया गया कि वर्ष 2021-22 में रहसपुर के स्थान पर मनिरामपुर में स्वास्थ्य उपकेंद्र की स्वीकृति दी गई है, वहीं पलियादाहा के स्थान पर रामघाटी में स्वास्थ्य केंद्र निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है।
जर्जर भवनों को किया जाएगा कंडम घोषित
समीक्षा के क्रम में यह पाया गया कि जिले के 9 स्वास्थ्य उपकेंद्र भवन अत्यधिक जर्जर अवस्था में हैं। उपायुक्त ने इन भवनों को कंडम घोषित कर नियमानुसार आगे की कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
इसके अलावा शेष 7 स्वास्थ्य उपकेंद्रों हेतु भूमि चयन की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करने के लिए प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी एवं अंचलाधिकारी को पत्राचार कर आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया गया।
गुणवत्ता और समयबद्धता पर दिया गया विशेष बल
बैठक में उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि –
“स्वास्थ्य अवसंरचना से जुड़ी योजनाएँ जनहित से सीधे तौर पर संबंधित हैं। अतः विभाग यह सुनिश्चित करे कि सभी कार्य गुणवत्तापूर्ण ढंग से एवं निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण हों, ताकि ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ सुलभ हो सकें।”
उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि योजनाओं की प्रगति की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाए।

