गोपाल शर्मा
झारखंड/ साहिबगंज।
आस्था, संयम और पवित्रता के प्रतीक छठ महापर्व की गूंज इस बार साहिबगंज मंडलकारा के अंदर भी सुनाई दी। जेल की चारदीवारी के भीतर दो पुरुष बंदियों ने श्रद्धा और विश्वास के साथ छठ व्रत का पालन करते हुए सूर्य उपासना की, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

छठ पर्व के अवसर पर जेल प्रशासन की ओर से व्रती बंदियों को पूजन और अर्घ्यदान हेतु आवश्यक सभी सामग्रियाँ — फल, प्रसाद, दीप, वस्त्र, बाँस की सूप, टोकरी आदि — उपलब्ध कराई गईं। अर्घ्यदान के लिए विशेष व्यवस्था जेल परिसर में ही की गई, ताकि व्रती बंदी पारंपरिक विधि-विधान के साथ पूजा कर सकें।
जेल अधीक्षक चंद्रशेखर प्रसाद सुमन ने बताया कि
“छठ पर्व आस्था, संयम और पवित्रता का प्रतीक है। हर व्यक्ति को अपनी श्रद्धा व्यक्त करने का अधिकार है। प्रशासन का दायित्व है कि हम हर बंदी की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करें और उन्हें अपने विश्वास के अनुरूप पूजा-अर्चना का अवसर दें।”
इस अवसर पर जेल कर्मियों एवं अन्य बंदियों ने भी सहयोग प्रदान किया तथा सामूहिक रूप से शांति, सौहार्द और समाज में सद्भावना की कामना की।
मंडलकारा साहिबगंज में मनाया गया यह छठ पर्व इस बात का प्रतीक बना कि आस्था और श्रद्धा की कोई सीमा नहीं होती — चाहे स्थान कैसा भी हो, विश्वास और भक्ति हर हृदय में अपना स्थान बना लेती है।


