पूर्व विधायक राजकुमार यादव और जिला सचिव अशोक पासवान के नेतृत्व में कार्यकर्ता हुए रवाना, कहा- भारतीय कम्युनिस्ट आंदोलन में उनके योगदान को हमेशा याद किया जायगा
गिरिडीह :भारतीय कम्युनिस्ट आंदोलन के वरिष्ठ नेता और भाकपा-माले के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे कॉमरेड स्वदेश भट्टाचार्य को अंतिम विदाई देने के लिए सोमवार अहले सुबह गिरिडीह से पार्टी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं का एक जत्था पटना के लिए रवाना हुआ। जत्थे का नेतृत्व भाकपा-माले राज्य कमेटी सदस्य एवं राजधनवार के पूर्व विधायक कॉ. राजकुमार यादव तथा जिला सचिव कॉ. अशोक पासवान ने किया। इस मौके पर पूर्व विधायक राजकुमार यादव ने कहा कि कॉमरेड स्वदेश भट्टाचार्य भारतीय कम्युनिस्ट आंदोलन के संघर्षशील योद्धा थे। कॉमरेड चारू मजूमदार की शहादत के बाद 28 जुलाई 1974 को पुनर्गठित भाकपा-माले को खड़ा करने वाले संस्थापक सदस्यों में वे शामिल थे। उनके निधन से पार्टी ने अपना एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक खो दिया है। जिला सचिव अशोक पासवान ने बताया कि कॉ. स्वदेश भट्टाचार्य का निधन 30 अक्टूबर को पटना में हुआ था। 31 अक्टूबर को उनके पार्थिव शरीर को पटना से आरा (भोजपुर) स्थित क्रांति पार्क ले जाया गया, जहां लोगों ने अंतिम दर्शन किए। एक नवंबर को पार्थिव शरीर वापस पटना लाया गया। दो नवंबर को देशभर से पहुंचे लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने शवयात्रा में शामिल होकर उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई दी।
माले नेता राजेश सिन्हा ने कहा कि कॉमरेड स्वदेश भट्टाचार्य जैसे संघर्षशील योद्धा को आने वाली पीढ़ियां भी याद रखेंगी। वहीं शंकर पांडेय, सकलदेव यादव और कन्हाई पांडेय ने कहा कि जिस दौर में पार्टी को खड़ा करना बेहद चुनौतीपूर्ण था, उस समय कॉमरेड स्वदेश भट्टाचार्य ने संगठन निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके संघर्ष और योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। पटना रवाना हुए जत्थे में असंगठित मजदूर मोर्चा के केंद्रीय सचिव कॉ. कन्हैया पांडेय, जन संस्कृति मंच के राज्य उपाध्यक्ष शंकर पांडेय, ऐपवा नेत्री मीना दास, जिला कमेटी सदस्य सह जिला परिषद सदस्य विजय पांडेय, गिरिडीह नगर सचिव राजेश सिन्हा, रामलाल मुर्मू, मसूदन कोल्ह, सकलदेव यादव, झामस नेता भीखन अंसारी, भागीरथ पंडित, भोला पासवान, बलदेव यादव, लखन यादव, किसान नेता खूबलाल राय, भिखारी राय समेत दर्जनों कार्यकर्ता शामिल थे।
कॉ. स्वदेश भट्टाचार्य को अंतिम विदाई देने पटना रवाना हुआ गिरिडीह से माले का जत्था।