03 Nov 2026
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लोहे के स्लीपर गाड़कर रेलवे ने रोका आवागमन, किसानों ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी

प्रिंस मिश्रा
प्रिंस मिश्रा reporter
📅 03 Nov 2026, 06:13 AM IST
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लोहे के स्लीपर गाड़कर रेलवे ने रोका आवागमन, किसानों ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी
कोटालपोखर:
बड़हरवा-पाकुड़ रेलखंड के कोटालपोखर रेलवे स्टेशन के समीप विजयपुर गांव स्थित रेलवे पुल संख्या 256 पर रेलवे प्रशासन द्वारा लोहे के स्लीपर गाड़कर रास्ता बाधित किए जाने से स्थानीय किसानों में भारी आक्रोश है। आवागमन का रास्ता बंद होने से नाराज सोमवार को आसपास के दर्जनों गांवों के किसानों ने रेलवे पुल के समीप पहुंचकर जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया। इस दौरान किसानों ने रेलवे प्रशासन एवं सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए अविलंब रास्ता चालू कराने की मांग की।
प्रदर्शन में मयूरकोला, दुखियाटोला, ढाटापारा, पथरिया, बड़ा सुनाकर, विजयपुर और मुसहरी टोला सहित आसपास के गांवों के दर्जनों किसान शामिल हुए। किसानों ने कहा कि रेलवे पुल पर लोहे के स्लीपर गाड़ दिए जाने के कारण बैलगाड़ी और छोटे वाहनों का आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। इससे न केवल किसानों की रोजमर्रा की आवाजाही प्रभावित हुई है, बल्कि कृषि कार्य और फसलों की ढुलाई भी मुश्किल हो गई है।

धान कटनी से पहले बढ़ी किसानों की चिंता

किसानों की सबसे बड़ी चिंता धान कटनी को लेकर है। धान की फसल तैयार होने के साथ ही कटनी का समय नजदीक आ गया है। ऐसे में खेतों से धान काटकर खलिहान तक पहुंचाना किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। ग्रामीणों के अनुसार, पहले किसान इसी रेलवे पुल से बैलगाड़ी और छोटे वाहनों के माध्यम से अपनी उपज खलिहान तक पहुंचाते थे। लेकिन रेलवे द्वारा पुल पर लोहे के स्लीपर गाड़कर रास्ता बाधित कर दिए जाने से अब इस मार्ग से आवागमन संभव नहीं रह गया है।
नतीजतन किसानों को अपनी फसल और कृषि उपज की ढुलाई के लिए करीब 20 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है। इससे किसानों का समय और श्रम तो बर्बाद हो ही रहा है, साथ ही परिवहन खर्च का अतिरिक्त बोझ भी उठाना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि खेती पहले से ही महंगी होती जा रही है। खाद, बीज, सिंचाई और मजदूरी पर लगातार बढ़ते खर्च के बीच इतनी लंबी दूरी तय करना उनके लिए आर्थिक रूप से बेहद कठिन है।

दूसरा रेलवे पुल नहीं होने से ग्रामीणों की बढ़ी मुश्किलें

प्रदर्शन कर रहे किसानों ने बताया कि कोटालपोखर से गुमानी तक के क्षेत्र में आवागमन के लिए कोई दूसरा रेलवे पुल उपलब्ध नहीं है। ऐसे में रेलवे पुल संख्या 256 ही आसपास के कई गांवों के लोगों के लिए आवागमन का महत्वपूर्ण रास्ता रहा है। इस पुल पर रास्ता बंद होने से मयूरकोला, दुखियाटोला, ढाटापारा, पथरिया, बड़ा सुनाकर, विजयपुर और मुसहरी टोला के ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है।
किसानों का कहना है कि रेलवे सुरक्षा के दृष्टिकोण से कोई कदम उठाना चाहता है तो उन्हें इससे आपत्ति नहीं है, लेकिन ग्रामीणों की वर्षों पुरानी आवागमन संबंधी जरूरतों और किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रास्ता बंद कर देना उचित नहीं है। रेलवे प्रशासन को रास्ता बंद करने से पहले ग्रामीणों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए थी।

रेलवे प्रशासन से जल्द समाधान की मांग

स्थानीय किसान बलदेव साहा ने कहा कि रेलवे के इस कार्य से क्षेत्र के किसानों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। धान कटनी का समय सामने है और किसानों को खेतों से धान निकालकर खलिहान तक पहुंचाना जरूरी है। लेकिन पुल पर लोहे के स्लीपर लगाए जाने के कारण बैलगाड़ी और छोटे वाहन भी नहीं निकल पा रहे हैं। उन्होंने रेलवे प्रशासन से किसानों की परेशानी को गंभीरता से समझते हुए जल्द समाधान करने की मांग की।
वहीं किसान मो. रिजवान ने कहा कि किसान पहले से ही खेती की बढ़ती लागत और मौसम की मार से परेशान हैं। ऐसे में रेलवे पुल पर रास्ता बंद होने से उनकी समस्याएं और बढ़ गई हैं। अनाज की ढुलाई के लिए करीब 20 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना किसानों के लिए बेहद मुश्किल है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते आवागमन की उचित व्यवस्था नहीं की गई तो किसान रेलवे प्रशासन के खिलाफ आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होंगे।
प्रदर्शन में शामिल एक अन्य किसान ने कहा कि रेलवे सुरक्षा के नाम पर रास्ता बंद करने से पहले स्थानीय ग्रामीणों की जरूरतों और आवागमन की सुविधा का ध्यान रखा जाना चाहिए था। धान कटनी के महत्वपूर्ण समय में रास्ता बाधित होने से पूरे इलाके के किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने रेलवे प्रशासन से तत्काल वैकल्पिक रास्ते की व्यवस्था करने की मांग की।

समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी

प्रदर्शन कर रहे किसानों ने एक स्वर में रेलवे प्रशासन से मांग की कि रेलवे पुल संख्या 256 पर किसानों एवं ग्रामीणों के सुरक्षित आवागमन के लिए उचित व्यवस्था की जाए। यदि किसी कारणवश पुल से आवागमन संभव नहीं है तो तत्काल वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराया जाए, ताकि किसानों को अपनी उपज खेतों से खलिहान और बाजार तक पहुंचाने में परेशानी न हो।
किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि धान कटनी शुरू होने से पहले यदि उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आसपास के सभी गांवों के किसान एकजुट होकर व्यापक आंदोलन करेंगे। फिलहाल किसानों की निगाहें रेलवे प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। अब देखना यह है कि रेलवे प्रशासन किसानों की इस गंभीर समस्या पर कब संज्ञान लेता है और क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों की आवागमन संबंधी परेशानी दूर करने के लिए क्या पहल करता है।