साहिबगंज जिले के पतना प्रखंड अंतर्गत उत्क्रमित उच्च विद्यालय दुर्गापुर में शिक्षा व्यवस्था इन दिनों कई बुनियादी समस्याओं से जूझ रही है। विद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी, जर्जर भवन और बेंच-डेस्क के अभाव के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। स्थिति यह है कि कक्षा एक से दसवीं तक नामांकित कुल 267 विद्यार्थियों के शिक्षण कार्य की जिम्मेदारी महज तीन शिक्षकों के कंधों पर है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि सीमित शिक्षकों के सहारे सभी कक्षाओं का नियमित संचालन और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना कितना चुनौतीपूर्ण है।
*तीन शिक्षकों पर 267 विद्यार्थियों की जिम्मेदारी*
विद्यालय में कक्षा एक से दसवीं तक कुल 267 विद्यार्थी नामांकित हैं। इनमें कक्षा एक से आठवीं तक 121 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनकी पढ़ाई की जिम्मेदारी सहायक शिक्षक मुंशी हेम्ब्रम संभाल रहे हैं। वहीं, कक्षा नौवीं और दसवीं के 146 विद्यार्थियों को अनिल कुमार साहा और विद्यालय के प्राचार्य अजय कुमार पढ़ाते हैं। विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में शिक्षकों की कमी होने से शैक्षणिक कार्यों का संचालन चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। सीमित मानव संसाधन के बीच शिक्षकों को अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों को पढ़ाने के साथ विद्यालय की अन्य जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं।
*प्रतिनियुक्ति और एसआईआर कार्य से बढ़ी परेशानी*
विद्यालय में शिक्षकों की कमी की समस्या और गंभीर हो गई है। जानकारी के अनुसार, एक शिक्षक को बोरियो में प्रतिनियुक्त किया गया है, जबकि दूसरे शिक्षक को एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) कार्य में लगाया गया है। इसके कारण विद्यालय में उपलब्ध शिक्षकों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी आ गई है। शिक्षा व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता जरूरी है, लेकिन मौजूदा स्थिति में विद्यालय को सीमित संसाधनों के सहारे ही पढ़ाई संचालित करनी पड़ रही है।
*वर्ष 2011 में उत्क्रमित, फिर भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव*
उत्क्रमित उच्च विद्यालय दुर्गापुर को वर्ष 2011 में मध्य विद्यालय से उच्च विद्यालय का दर्जा दिया गया था। इसके बावजूद विद्यालय में शिक्षकों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो सकी है। उच्च कक्षाओं की पढ़ाई के लिए आवश्यक शैक्षणिक संसाधनों और आधारभूत सुविधाओं की कमी भी चिंता का विषय बनी हुई है। विद्यालय भवन की जर्जर स्थिति विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए परेशानी का कारण है। इसके अलावा, पर्याप्त बेंच-डेस्क नहीं होने से विद्यार्थियों को बैठने की व्यवस्था में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। वहीं, चपरासी का पद रिक्त रहने से विद्यालय के दैनिक कार्यों पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
*विभाग को कई बार दी गई जानकारी, समाधान का इंतजार*
विद्यालय के प्राचार्य अजय कुमार ने बताया कि विद्यालय में व्याप्त समस्याओं से संबंधित विभागीय अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया है। इसके बावजूद अब तक समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। शिक्षकों की कमी दूर करने, भवन की स्थिति में सुधार लाने और विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त बेंच-डेस्क उपलब्ध कराने की आवश्यकता बनी हुई है।
*बच्चों के भविष्य को लेकर उठ रहे सवाल*
सरकारी विद्यालयों में बेहतर शिक्षा और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना शिक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे में दुर्गापुर उच्च विद्यालय की मौजूदा स्थिति कई सवाल खड़े करती है। जब एक ही विद्यालय में 267 विद्यार्थियों की पढ़ाई महज तीन शिक्षकों के भरोसे चल रही हो, तो सभी कक्षाओं में नियमित शिक्षण कार्य और पढ़ाई की गुणवत्ता बनाए रखना बड़ी चुनौती बन जाता है।
अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग इस समस्या को दूर करने के लिए कब ठोस पहल करता है। विद्यालय में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति या उपलब्धता सुनिश्चित करने, जर्जर भवन की मरम्मत कराने, बेंच-डेस्क की व्यवस्था करने और रिक्त चपरासी पद से जुड़ी समस्या का समाधान करने की दिशा में समयबद्ध कदम उठाना जरूरी है, ताकि दुर्गापुर उच्च विद्यालय के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सके और उनका भविष्य प्रभावित न हो।
तीन शिक्षकों के भरोसे 267 विद्यार्थियों का भविष्य, दुर्गापुर उच्च विद्यालय में पढ़ाई पर संकट