राजमहल में केसीसी एवं ‘खेत बचाओ अभियान’ पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, कम ब्याज पर ऋण और आधुनिक खेती की दी जानकारी
राजमहल।
किसानों को कृषि कार्यों के लिए सुलभ ऋण उपलब्ध कराने तथा फसलों को विभिन्न प्रकार की क्षति से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से शुक्रवार को राजमहल प्रखंड सभागार में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) एवं ‘खेत बचाओ अभियान’ विषयक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रखंड विकास पदाधिकारी मो. यूसुफ ने की।

कार्यक्रम में जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक, प्रखंड कृषि पदाधिकारी, प्रखंड तकनीकी प्रबंधक, प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधक, झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रोमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) के प्रतिनिधि तथा कृषि समन्वयक निकेश कुमार सहित कृषि एवं बैंकिंग विभाग के कई अधिकारी उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में किसान भी कार्यक्रम में शामिल हुए और कृषि योजनाओं की जानकारी प्राप्त की।

अधिकारियों ने किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत उपलब्ध सुविधाओं की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना के माध्यम से किसान कम ब्याज दर पर कृषि ऋण प्राप्त कर खेती से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा कर सकते हैं। कार्यक्रम में ऋण आवेदन की प्रक्रिया, पात्रता मानदंड तथा योजना से मिलने वाले लाभों के बारे में विस्तार से बताया गया।
इस अवसर पर ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसानों को फसलों को कीट एवं रोगों से बचाने के उपायों, आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग, समयबद्ध कृषि प्रबंधन तथा प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के तरीकों की जानकारी दी गई। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने और नई तकनीकों के प्रयोग के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अधिकारियों ने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है। किसानों को चाहिए कि वे इन योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाएं और आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ें।
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान किसानों ने कृषि ऋण, फसल प्रबंधन, सरकारी योजनाओं तथा खेती से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपनी जिज्ञासाएं रखीं, जिनका अधिकारियों द्वारा समाधान किया गया। किसानों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे खेती-किसानी के लिए उपयोगी बताया।
ग्रामीण क्षेत्र में कृषि जागरूकता बढ़ाने और किसानों को योजनाओं से जोड़ने की दिशा में यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण साबित हुआ। अधिकारियों ने भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही, ताकि किसानों को समय-समय पर नई तकनीकों एवं सरकारी योजनाओं की जानकारी मिलती रहे।