आदिवासी अस्मिता, जल-जंगल-जमीन और सामाजिक न्याय की लड़ाई को मिला राष्ट्रीय सम्मान
रांची, प्रतिनिधि।
झारखंड आंदोलन के प्रमुख सूत्रधार, आदिवासी समाज के महान जननायक और ‘दिशोम गुरु’ के नाम से विख्यात स्वर्गीय शिबू सोरेन को मरणोपरांत देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। मंगलवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य एवं गरिमामय समारोह में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यह सम्मान प्रदान किया। स्वर्गीय शिबू सोरेन की ओर से उनकी पत्नी श्रीमती रूपी सोरेन ने पद्म भूषण सम्मान ग्रहण किया।


इस अवसर पर भावुक माहौल देखने को मिला। सम्मान ग्रहण करने के बाद रूपी सोरेन ने इसे पूरे झारखंड और आदिवासी समाज के लिए गौरव का क्षण बताते हुए कहा कि यह सम्मान केवल शिबू सोरेन के संघर्षों और योगदान का नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों की आकांक्षाओं का सम्मान है जिनके अधिकारों और पहचान के लिए उन्होंने जीवनभर संघर्ष किया।
स्वर्गीय शिबू सोरेन ने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में आदिवासियों, दलितों, पिछड़ों और वंचित वर्गों के अधिकारों की आवाज बुलंद की। उन्होंने जल, जंगल और जमीन की रक्षा को लेकर व्यापक जनआंदोलन खड़ा किया और झारखंड राज्य गठन के आंदोलन को नई दिशा दी। उनके नेतृत्व और संघर्ष के परिणामस्वरूप अलग झारखंड राज्य की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिली। इसी कारण उन्हें झारखंड आंदोलन का प्रमुख वास्तुकार माना जाता है।
राजनीतिक जीवन में भी शिबू सोरेन का योगदान उल्लेखनीय रहा। वे कई बार सांसद चुने गए, केंद्र सरकार में कोयला मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दीं तथा तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री पद पर भी आसीन रहे। सामाजिक न्याय, जनहित और आदिवासी स्वाभिमान के मुद्दों पर उनका संघर्ष हमेशा लोगों के बीच प्रेरणा का स्रोत बना रहा।
समारोह में झारखंड की गांडेय विधायक कल्पना सोरेन भी मौजूद रहीं। वहीं देशभर के राजनीतिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोगों ने दिशोम गुरु को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके योगदान को अविस्मरणीय बताया।
राज्यभर में इस सम्मान को लेकर खुशी की लहर है। विभिन्न सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और आदिवासी समाज के लोगों ने इसे झारखंड की अस्मिता, संघर्ष और गौरव का सम्मान बताया है। लोगों का मानना है कि पद्म भूषण सम्मान से दिशोम गुरु के विचारों, आदर्शों और संघर्षों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिलेगी तथा समाज के वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए उनके संघर्ष को नई पहचान मिलेगी।
स्वर्गीय शिबू सोरेन को मिला यह राष्ट्रीय सम्मान उनके संघर्षमय जीवन, जनसेवा और आदिवासी समाज के उत्थान के प्रति समर्पण की ऐतिहासिक मान्यता के रूप में याद किया जाएगा।
