कभी नक्सल प्रभाव से उपेक्षित रहा इलाका, अब विकास और अधिकार के भरोसे से जुड़ रहा मुख्यधारा से
बोकारो, प्रतिनिधि।
जिला मुख्यालय से करीब 85 किलोमीटर दूर गोमिया प्रखंड की सियारी पंचायत अंतर्गत बिरहोर कण्डा (डुमरी) गांव बुधवार को प्रशासन और ग्रामीणों के बीच विश्वास के नए संवाद का केंद्र बना। कभी घोर नक्सल प्रभाव और विकास से उपेक्षा के कारण चर्चा में रहने वाला यह इलाका अब बदलाव की नई तस्वीर पेश कर रहा है। लोक संवाद कार्यक्रम के तहत उपायुक्त अजय नाथ झा और पुलिस अधीक्षक नाथू सिंह मीना स्वयं गांव पहुंचे और बरगद की छांव तले पीवीजीटी बिरहोर परिवारों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं।

दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्र में प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी ने ग्रामीणों के बीच भरोसे का नया संदेश दिया। बरगद के पेड़ के नीचे लगा यह जनता दरबार केवल शिकायत सुनने का मंच नहीं रहा, बल्कि शासन-प्रशासन की उस संवेदनशील पहल का प्रतीक बना, जो अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने की प्रतिबद्धता दर्शाता है।
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने आवास, पेयजल, सड़क, तालाब जीर्णोद्धार, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं उपायुक्त के समक्ष रखीं। ग्रामीणों की मांग पर उपायुक्त ने बताया कि मध्य विद्यालय डुमरी बिरहोर को उच्च विद्यालय में अपग्रेड करने के लिए जिला स्तर से प्रस्ताव विभाग को भेजा जा चुका है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया की वे स्वयं निगरानी करेंगे, ताकि क्षेत्र के बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए दूर नहीं जाना पड़े।

वन अधिकार और आजीविका पर विशेष फोकस
उपायुक्त अजय नाथ झा ने कहा कि यह क्षेत्र आदिवासी और गैर-आदिवासी सामाजिक समरसता का सुंदर उदाहरण है। उन्होंने सामूहिक वन अधिकार के तहत पात्र लोगों को पट्टा दिलाने के लिए ग्रामसभा से प्रस्ताव पारित कर आगे बढ़ने का आह्वान किया। साथ ही वन अधिकार कानून के प्रति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का निर्देश भी दिया।
उन्होंने पंचायत क्षेत्र में सड़क, विद्यालय और जलापूर्ति योजनाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए ग्रामसभा आधारित प्रस्ताव जिला प्रशासन को भेजने की बात कही। पीएम जनमन योजना के तहत जर्जर आवास वाले पात्र परिवारों को लाभान्वित करने का भी निर्देश दिया गया।
उपायुक्त ने पंचायत के मुखिया रामवृक्ष मुर्मू से अपील करते हुए कहा कि पंचायत के सभी गांवों को बिना भेदभाव सरकारी योजनाओं से जोड़ना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि सामाजिक एकता और आपसी सहयोग ही इस क्षेत्र की सबसे बड़ी ताकत है।

संस्कृति संरक्षण के साथ विकास की पहल
उपायुक्त ने स्थानीय परंपरा और संस्कृति के संरक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने कल्याण विभाग के माध्यम से वाद्य यंत्र वितरण तथा सप्ताह में एक दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही, ताकि बिरहोर समुदाय की पारंपरिक पहचान और सांस्कृतिक धरोहर जीवित रह सके।
इस दौरान बच्चों के बीच कॉपी-कलम, फुटबॉल, बैट-बॉल आदि का वितरण भी किया गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लॉन बॉल में बोकारो का नाम रोशन करने वाली रेशमा कुमारी को उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक ने प्रशस्ति पत्र एवं शॉल देकर सम्मानित किया।

“डरने की जरूरत नहीं, प्रशासन आपके साथ है” : एसपी
पुलिस अधीक्षक नाथू सिंह मीना ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि यह क्षेत्र कभी नक्सल समस्या से प्रभावित रहा, जिससे विकास की गति बाधित हुई। लेकिन अब हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि किसी भी भ्रामक या असामाजिक तत्व को दोबारा पनपने का मौका न दें।
उन्होंने कहा कि किसी भी फर्जी समूह या असामाजिक तत्व से डरने की आवश्यकता नहीं है। यदि कोई समस्या हो तो तत्काल प्रशासन को सूचना दें, हर संभव सहयोग दिया जाएगा।
डीडीसी ने भी दिया समाधान का भरोसा
उप विकास आयुक्त शताब्दी मजूमदार ने भी ग्रामीणों को संबोधित करते हुए उनकी समस्याओं के समाधान के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता दोहराई। ग्रामीणों द्वारा पत्तल निर्माण और रस्सी निर्माण के लिए मशीन उपलब्ध कराने की मांग पर उन्होंने सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम स्थल पर स्वास्थ्य शिविर भी लगाया गया, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीणों की स्वास्थ्य जांच कर आवश्यक परामर्श दिया गया।

भरोसे और विकास का नया संदेश
बिरहोर कण्डा में आयोजित यह जनता दरबार केवल समस्याओं के समाधान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने यह संदेश भी दिया कि अब शासन-प्रशासन दूरस्थ पहाड़ियों और अंतिम छोर के गांवों तक पहुंच रहा है। बरगद की छांव तले बैठा यह संवाद ग्रामीणों के मन में यह विश्वास छोड़ गया कि प्रशासन केवल सुनने नहीं, बल्कि उनके साथ खड़े होने आया है।
मौके पर जिला स्तरीय अधिकारी, जिला परिषद सदस्य, प्रखंड प्रमुख, पंचायत प्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
