राजमहल, संवाददाता।
राजमहल प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में मंगलवार को एक पेड़ के नीचे भारी मात्रा में एक्सपायरी सरकारी दवाइयां मिलने से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में अक्सर दवाइयों की कमी तथा स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव की शिकायतें सामने आती रहती हैं, वहीं दूसरी ओर जरूरतमंद मरीजों और गर्भवती महिलाओं के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली सरकारी दवाइयों का इस तरह खुले में फेंका जाना लोगों के बीच चर्चा और चिंता का विषय बन गया है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अंचल कार्यालय परिसर में एक स्थान पर बड़ी संख्या में दवाइयों के पत्ते बिखरे पड़े मिले। इनमें मुख्य रूप से “आयरन एंड फोलिक एसिड टैबलेट्स आईपी” शामिल हैं। यह दवा गर्भवती महिलाओं, किशोरियों तथा एनीमिया (खून की कमी) से पीड़ित मरीजों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती है। दवा शरीर में आयरन और फोलिक एसिड की कमी को पूरा करने तथा रक्त की मात्रा बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि दवा के पत्तों पर झारखंड सरकार का लोगो अंकित है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि दवाइयां सरकारी आपूर्ति की हैं। दवाइयों की एक्सपायरी अवधि समाप्त हो चुकी है और इन्हें नियमानुसार सुरक्षित तरीके से नष्ट करने के बजाय खुले परिसर में फेंक दिया गया है। इससे न केवल सरकारी संसाधनों की बर्बादी का मामला सामने आया है, बल्कि पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी खतरा उत्पन्न होने की आशंका जताई जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इन दवाइयों का समय रहते वितरण किया गया होता तो जरूरतमंद मरीजों को इसका लाभ मिल सकता था। लोगों ने सवाल उठाया कि जब सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में दवाओं की उपलब्धता को लेकर अक्सर शिकायतें मिलती हैं, तब इतनी बड़ी मात्रा में दवाइयां एक्सपायर कैसे हो गईं। साथ ही यह भी सवाल उठ रहा है कि इन दवाइयों को अंचल कार्यालय परिसर तक कौन लाया और किसके निर्देश पर यहां फेंका गया।
घटना की जानकारी फैलते ही प्रखंड एवं अंचल कार्यालय परिसर में दिनभर इस मामले को लेकर चर्चा होती रही। लोगों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दवाइयों के स्रोत का पता लगाने तथा दोषी अधिकारियों या कर्मियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सरकारी योजनाओं के तहत स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। ऐसे में सरकारी दवाइयों का एक्सपायर होकर खुले में फेंका जाना न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि जनहित से जुड़े संसाधनों के प्रबंधन पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि दवाइयां किस विभाग अथवा स्वास्थ्य केंद्र से संबंधित हैं। मामले की जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम का खुलासा हो सकेगा। हालांकि घटना ने सरकारी दवाओं के भंडारण, वितरण और निस्तारण व्यवस्था की निगरानी को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।