रांची, प्रतिनिधि।
झारखंड की राजनीति में एक बार फिर नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पूर्व मंत्री एवं जनता दल यूनाइटेड (जदयू) विधायक सरयू राय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक अनोखा राजनीतिक फॉर्मूला सुझाते हुए दावा किया है कि झारखंड में भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के समर्थन के बिना भी सरकार का संचालन संभव है।

एक समाचार चैनल से बातचीत के दौरान सरयू राय ने कहा कि यदि राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई जाए तो वर्तमान विधानसभा की स्थिति में 41 विधायकों के समर्थन से सरकार चलाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), राष्ट्रीय जनता दल (राजद), वामदलों और जदयू के सहयोग से बहुमत का आंकड़ा हासिल किया जा सकता है।
सरयू राय के अनुसार झामुमो के 34 विधायक, राजद के 4 विधायक, वामदलों के 2 विधायक तथा जदयू के 1 विधायक को मिलाकर कुल 41 विधायकों का समर्थन जुटाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस गणित के आधार पर भाजपा और कांग्रेस दोनों प्रमुख दलों से अलग रहकर भी सरकार का गठन और संचालन संभव है।
उन्होंने कहा कि राज्य की राजनीति में वैकल्पिक व्यवस्था बनाने की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस संबंध में अभी तक किसी प्रकार की औपचारिक राजनीतिक पहल या बातचीत की जानकारी उनके पास नहीं है।
राजनीतिक गलियारों में बढ़ी चर्चा
सरयू राय के इस बयान के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनका यह बयान केवल एक राजनीतिक सुझाव नहीं, बल्कि झारखंड की बदलती राजनीति के बीच संभावित नए समीकरणों की ओर संकेत भी माना जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भविष्य में ऐसी कोई पहल होती है तो राज्य की राजनीति में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि वर्तमान में झामुमो, कांग्रेस और राजद के गठबंधन की सरकार कार्यरत है और किसी भी दल की ओर से गठबंधन में बदलाव के संकेत नहीं मिले हैं।
मुखर राजनीति के लिए जाने जाते हैं सरयू राय
सरयू राय झारखंड की राजनीति के उन नेताओं में गिने जाते हैं जो अपने स्पष्ट और बेबाक बयानों के लिए चर्चित रहे हैं। वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास को जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा सीट से पराजित कर राज्य की राजनीति में बड़ा राजनीतिक संदेश दिया था। इसके बाद से वे लगातार सरकार और विपक्ष दोनों पर अपनी स्वतंत्र राय रखते रहे हैं।
अब तक नहीं आई कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया
सरयू राय के इस राजनीतिक फॉर्मूले पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, झामुमो अथवा अन्य सहयोगी दलों की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि उनके बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस को जन्म दे दिया है और आने वाले दिनों में इस पर विभिन्न दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।
फिलहाल सरयू राय के इस बयान को झारखंड की राजनीति में संभावित नए समीकरणों की चर्चा के रूप में देखा जा रहा है, जिसने सत्ता और विपक्ष दोनों खेमों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।