साहिबगंज, प्रतिनिधि।
संताल हूल क्रांति के महानायकों वीर शहीद सिदो-कान्हु, चांद-भैरव तथा फूलो-झानो की स्मृति में इस वर्ष 30 जून को बरहेट प्रखंड स्थित ऐतिहासिक भोगनाडीह में हूल दिवस धूमधाम से मनाया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन सिदो कान्हु हुल फाउंडेशन एवं आतो मांझी बैसी के संयुक्त तत्वावधान में किया जाएगा। इस अवसर पर सामाजिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक कार्यक्रमों के साथ विचार गोष्ठी का भी आयोजन किया जाएगा।

शनिवार को शहर के एक होटल में आयोजित प्रेस वार्ता में सिदो कान्हु के छठी पीढ़ी के वंशज एवं सिदो कान्हु हुल फाउंडेशन के अध्यक्ष मंडल मुर्मू ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के आयोजन को लेकर सदर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) को ज्ञापन सौंप दिया गया है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष की तरह इस बार भी वंशज परिवार, सिदो कान्हु हुल फाउंडेशन और आतो मांझी बैसी की ओर से अपने पूर्वजों की पावन भूमि भोगनाडीह में हूल दिवस का आयोजन किया जाएगा।
मंडल मुर्मू ने बताया कि 29 एवं 30 जून को फुटबॉल प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी, जबकि 30 जून की सुबह 7 बजे वंशज परिवार की ओर से पारंपरिक विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की जाएगी। इसके बाद सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक विचार गोष्ठी, सामाजिक-सांस्कृतिक प्रस्तुतियां तथा पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। उन्होंने कहा कि भोगनाडीह स्टेडियम वीर शहीद सिदो-कान्हु मुर्मू की ऐतिहासिक और पावन जन्मस्थली है, इसलिए यह स्थान संताल समाज सहित समूचे आदिवासी समुदाय की आस्था और गौरव का केंद्र है।
उन्होंने कहा कि हूल दिवस केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत के प्रथम जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम की गौरवशाली विरासत, आदिवासी अस्मिता, स्वाभिमान और बलिदान को स्मरण करने का अवसर है। वर्ष 1855 में इसी भोगनाडीह की धरती से महान हूल क्रांति का शंखनाद हुआ था, जिसने अंग्रेजी शासन और शोषण के विरुद्ध जनआंदोलन का स्वरूप ग्रहण किया था।
मंडल मुर्मू ने बताया कि हूल दिवस के अवसर पर झारखंड ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में संताल समाज के लोग, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और श्रद्धालु भोगनाडीह पहुंचते हैं। यहां वे हूल क्रांति के महानायकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना और माल्यार्पण करते हैं।
उन्होंने कहा कि भोगनाडीह आज राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हूल क्रांति की पहचान का प्रमुख केंद्र बन चुका है। यहां आयोजित होने वाला हूल दिवस समारोह नई पीढ़ी को अपने इतिहास, संघर्ष और बलिदान की विरासत से जोड़ने का कार्य करता है।
प्रेस वार्ता में ग्राम प्रधान सह आतो मांझी बैसी के अध्यक्ष बबलू हांसदा, राजा हांसदा सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।