गंगा पर हमला करने वालों पर एनजीटी का शिकंजा कसा, माफियाओं में हड़कंप - अगली सुनवाई 29 जनवरी को
सैयद अरशद की याचिका पर एनजीटी में जोरदार सुनवाई, प्रदूषण बोर्ड और खान विभाग ने दाखिल किया जवाब, अब अरशद देंगे करारा प्रतिउत्तर
साहिबगंज। झारखंड की इकलौती गंगा तटीय जिले साहिबगंज की गंगा मां को बचाने की जंग में सोमवार को कोलकाता स्थित नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ईस्टर्न जोन बेंच में जोरदार सुनवाई हुई.चर्चित पर्यावरण योद्धा एवं सामाजिक कार्यकर्ता सैयद अरशद नसर की तरफ से एनजीटी में दायर बहुचर्चित याचिका संख्या-162/2023 पर पीठ के जस्टिस अरुण कुमार त्यागी, एक्सपर्ट मेंबर डॉ. ए. सेंथिल वेल और ईश्वर सिंह की खंडपीठ के समक्ष सभी पक्षों के जवाब पर गौर किया गया.विदित हो कि ट्रिब्यूनल के पूर्व के आदेश के आलोक में झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, झारखंड खान विभाग (सचिव एवं निदेशक, खान), राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, नई दिल्ली के निदेशक, उपायुक्त, साहिबगंज, जिला खनन पदाधिकारी, साहिबगंज, जिला परिवहन, पदाधिकारी साहिबगंज और निजी पक्षकार जीके इंटरप्राइजेज, मालदा (स्टोन बोल्डर सप्लायर) तथा मां तारा एंटरप्राइजेज कंस्ट्रक्शन कंपनी, मुजफ्फरपुर इन सभी ने अपना काउंटर एफिडेविट / हलफनामा और स्थलीय जांच रिपोर्ट एनजीटी में दाखिल कर दिया है.जवाबों को रिकॉर्ड पर लेते हुए माननीय पीठ ने सोमवार की सुनवाई में उपस्थित याचिकाकर्ता सैयद अरशद नसर को निर्देश दिया कि वह इन सभी हलफनामों के खिलाफ अपना प्रतिउत्तर दाखिल करें.अरशद का सीधा आरोप है कि साहिबगंज में गंगा नदी, उसके घाटों और किनारों से स्टोन बोल्डर, चिप्स और मेटल का अवैध परिवहन, भंडारण और स्टॉकयार्ड धड़ल्ले से चल रहा है. इससे गंगा नदी में भारी प्रदूषण, दुर्लभ संरक्षित प्रजाति गंगा डॉल्फिन के अस्तित्व पर संकट और जलीय इको-सिस्टम पूरी तरह तबाह हो रहा है.याचिका में अरशद ने मांग कि है कि गंगा और उसके आसपास से सभी खनिजों के उठाव, परिवहन और स्टॉकयार्ड पर तत्काल पूर्ण प्रतिबंध लगे और दोषियों पर भारी पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाकर पर्यावरणीय बहाली करवाई जाए.एनजीटी ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 29 जनवरी 2027 की तिथि मुकर्रर की है.उस दिन अरशद के प्रतिउत्तर के बाद मामले में निर्णायक बहस होने की उम्मीद है.सोमवार को हुई सुनवाई के बाद साहिबगंज से लेकर रांची और मालदा से लेकर मुजफ्फरपुर तक पत्थर कारोबार से जुड़े लोगों की धड़कनें तेज हो गई हैं.अगर अरशद के प्रतिउत्तर के बाद एनजीटी सख्त हुआ तो साहिबगंज में गंगा किनारे चल रहे सैकड़ों अवैध स्टॉकयार्ड और डंपर के खेल पर हमेशा के लिए ताला लग सकता है.पर्यावरण योद्धा अरशद ने कहा, यह जीत की ओर पहला कदम है.बोर्ड और विभागों ने जवाब दिया है, अब हम तथ्यों के साथ उनका पर्दाफाश करेंगे.यह गंगा मां की लड़ाई है, हम पीछे नहीं हटेंगे.
गंगा पर हमला करने वालों पर एनजीटी का शिकंजा कसा, माफियाओं में हड़कंप - अगली सुनवाई 29 जनवरी को