मोरडीहा दुर्गा मंदिर परिसर में 35 वें वर्ष भारी भीड़ वाली ऐतिहासिक मेला लगी
मोरडीहा दुर्गा मंदिर परिसर में 35 वें वर्ष भारी भीड़ वाली ऐतिहासिक मेला लगी ------------ गोड्डा जिले के ठाकुर गंगटी प्रखंड क्षेत्र का प्रचलित और सबसे बड़ा गांव मोरडीहा में विगत 34 वर्षों की तरह गुरुवार को भी 35वें वर्ष दुर्गा पूजा की 11वीं तिथि के अवसर पर भारी भीड़ वाली मेला लगी।बीती रात्रि सांस्कृतिक मंच पर दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष जयकांत यादव,कार्यालय प्रभारी सह दैनिक जागरण के गोल्डमेडलिस्ट पत्रकार फूलचंद पोद्दार,कार्यालय प्रभारी अरबिंद पासवान,युवा शक्ति संघ के अध्यक्ष सह दुर्गा पूजा समिति के कोषाध्यक्ष राजकुमार पासवान,पिंटू जायसवाल,
हिंदुस्तान पत्रकार मुकेश साह,सचिव प्रीतम यादव आदि ने मिलकर फिता काटकर सांस्कृतिक कार्यक्रम का उद्घाटन किया था। गुरुवार सुबह 10:00 बजे से ही श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़नी शुरू हो गई। प्रखंड क्षेत्र के अलावे निकटवर्ती मेहरमा,बोआरीजोर, महागामा,साहिबगंज जिले और पड़ोसी राज्य बिहार के भागलपुर आदि जिले क्षेत्र के श्रद्धालुओं का बड़ी संख्या में आगमन हुआ।वहीं अपने रीति रिवाज और व्यवहार बनाए रखने की दृष्टिकोण से गोड्डा जिले के कई गांव के साथ-साथ पड़ोसी जिले साहिबगंज के भी दर्जनों गांव के आदिवासी कला पार्टियों का भी आगमन हुआ।सभी कल पार्टी अपने साथ डिगा,मांडर, ढोल,मंजीरा,बासुरी और साज बाज के साथ उपस्थित हुए। दुर्गा मंदिर में प्रतिमा का दर्शन के बाद उन्हें मोरडीहा गांव के जानकार माटी कला पंडितों द्वारा सभी आदिवासी भाइयों को जल, फुल ,तुलसी,धूप आदि से सम्मानित किया गया उसके बाद उन आदिवासी भाई बहन कला पार्टीयों ने सिद्धू कान्हू रामलीला लंगड़े नृत्य का आकर्षक और जोरदार बेहतरीन प्रदर्शन किया।जिसे की हजारों श्रद्धालुओं ने सराहा। खासकर इसी आदिवासी नृत्य कला और रात्रि में होने वाले शांतिपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रम का आनंद उठाने के लिए देश के कई राज्यों के श्रद्धालु यहां पिछले 34 वर्षों से शामिल होते रहे हैं।और अभी इस 35वें वर्ष में भी यह सिलसिला जारी रहा ।दुर्गा पूजा समिति, युवा शक्ति संघ और संपूर्ण ग्रामीण पंचायत वासियों द्वारा हर प्रकार के कार्यों पर पैनी नजर रखी जाती है।इलाके के दर्जनों गांव के निवासियों और पुलिस प्रशासन का भी भरपूर सहयोग रहता है। 35 वर्षों का इस मोरडीहा दुर्गा पूजा का मेला अपने आप में एक ऐतिहासिक है।कि यहां हजारों श्रद्धालु अपने सामाजिक व्यवहारिक रिश्ते को कायम रखने में कामयाब हुए हैं। सभी आदिवासी कला पार्टियों को दुर्गा पूजा समिति, युवा शक्ति संघ, संपूर्ण ग्रामीण द्वारा विगत वर्षों कि तरह पुरस्कृत भी किया गया।
हिंदुस्तान पत्रकार मुकेश साह,सचिव प्रीतम यादव आदि ने मिलकर फिता काटकर सांस्कृतिक कार्यक्रम का उद्घाटन किया था। गुरुवार सुबह 10:00 बजे से ही श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़नी शुरू हो गई। प्रखंड क्षेत्र के अलावे निकटवर्ती मेहरमा,बोआरीजोर, महागामा,साहिबगंज जिले और पड़ोसी राज्य बिहार के भागलपुर आदि जिले क्षेत्र के श्रद्धालुओं का बड़ी संख्या में आगमन हुआ।वहीं अपने रीति रिवाज और व्यवहार बनाए रखने की दृष्टिकोण से गोड्डा जिले के कई गांव के साथ-साथ पड़ोसी जिले साहिबगंज के भी दर्जनों गांव के आदिवासी कला पार्टियों का भी आगमन हुआ।सभी कल पार्टी अपने साथ डिगा,मांडर, ढोल,मंजीरा,बासुरी और साज बाज के साथ उपस्थित हुए। दुर्गा मंदिर में प्रतिमा का दर्शन के बाद उन्हें मोरडीहा गांव के जानकार माटी कला पंडितों द्वारा सभी आदिवासी भाइयों को जल, फुल ,तुलसी,धूप आदि से सम्मानित किया गया उसके बाद उन आदिवासी भाई बहन कला पार्टीयों ने सिद्धू कान्हू रामलीला लंगड़े नृत्य का आकर्षक और जोरदार बेहतरीन प्रदर्शन किया।जिसे की हजारों श्रद्धालुओं ने सराहा। खासकर इसी आदिवासी नृत्य कला और रात्रि में होने वाले शांतिपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रम का आनंद उठाने के लिए देश के कई राज्यों के श्रद्धालु यहां पिछले 34 वर्षों से शामिल होते रहे हैं।और अभी इस 35वें वर्ष में भी यह सिलसिला जारी रहा ।दुर्गा पूजा समिति, युवा शक्ति संघ और संपूर्ण ग्रामीण पंचायत वासियों द्वारा हर प्रकार के कार्यों पर पैनी नजर रखी जाती है।इलाके के दर्जनों गांव के निवासियों और पुलिस प्रशासन का भी भरपूर सहयोग रहता है। 35 वर्षों का इस मोरडीहा दुर्गा पूजा का मेला अपने आप में एक ऐतिहासिक है।कि यहां हजारों श्रद्धालु अपने सामाजिक व्यवहारिक रिश्ते को कायम रखने में कामयाब हुए हैं। सभी आदिवासी कला पार्टियों को दुर्गा पूजा समिति, युवा शक्ति संघ, संपूर्ण ग्रामीण द्वारा विगत वर्षों कि तरह पुरस्कृत भी किया गया।