साहिबगंज, संवाददाता।
अक्षय तृतीया के अवसर पर जिले में बाल विवाह की रोकथाम को लेकर जिला प्रशासन एवं मंथन संगठन ने संयुक्त रूप से ‘सतर्कता दिवस’ मनाया। इस पहल का उद्देश्य बाल अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ समाज में जागरूकता बढ़ाना रहा। कार्यक्रम में जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी पूनम कुमारी, चाइल्ड हेल्पलाइन, बाल विवाह निषेध अधिकारी तथा आशा यूनिटों ने सक्रिय भागीदारी निभाई और जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प दोहराया।

जिला प्रशासन और मंथन संगठन द्वारा पंचायतों, स्कूलों और विभिन्न समुदायों के धर्मगुरुओं के साथ समन्वय स्थापित कर व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत गांव-गांव जाकर लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में बताया जा रहा है और हजारों लोगों को इसके खिलाफ शपथ दिलाई जा चुकी है। विशेष रूप से अक्षय तृतीया जैसे अवसरों को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और अभियान को और तेज किया गया है।

मंथन के निदेशक विप्लव महतो ने कहा कि अक्षय तृतीया जैसे शुभ अवसर की आड़ में बाल विवाह जैसे अपराध को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि प्रशासन और सामाजिक संगठनों की सतर्कता के कारण इस दिन होने वाले बाल विवाहों की संख्या में काफी कमी आई है, लेकिन इसे पूरी तरह समाप्त करना अभी भी चुनौती बना हुआ है।
उन्होंने आगे कहा कि पहले लोगों में यह जानकारी का अभाव था कि नाबालिग बच्चों की शादी बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (पीसीएमए), 2006 के तहत दंडनीय अपराध है।
इस कानून के अनुसार, बाल विवाह में किसी भी प्रकार से शामिल होने या सहयोग करने वाले—चाहे वह बाराती हों, लड़की पक्ष के लोग, कैटरर, डेकोरेटर, हलवाई, बैंड-बाजा कर्मी, मैरेज हॉल संचालक या विवाह संपन्न कराने वाले पंडित-मौलवी—सभी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। दोषी पाए जाने पर दो वर्ष तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
जागरूकता अभियानों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। अब आम नागरिक स्वयं बाल विवाह की सूचना प्रशासन को दे रहे हैं, जिस पर त्वरित कार्रवाई कर ऐसे मामलों को रोका जा रहा है। यह सामाजिक बदलाव का एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
मंथन संगठन, देशभर में बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए कार्यरत 250 से अधिक संगठनों के नेटवर्क ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’ का सहयोगी है। यह नेटवर्क देश के 450 से अधिक जिलों में बाल विवाह के खिलाफ अभियान चला रहा है और अब तक पांच लाख से अधिक बाल विवाहों को रोकने में सफल रहा है।
जिला प्रशासन और मंथन ने विश्वास जताया कि निरंतर प्रयासों और जनसहभागिता के बल पर वर्ष 2030 से पहले ही साहिबगंज जिले को बाल विवाह मुक्त बनाया जा सकता है।
