(सा.सं.) कोलकाता।
पश्चिम बंगाल में संभावित सत्ता परिवर्तन के साथ राज्य सरकार के कामकाज का केंद्र भी बदलने की तैयारी शुरू हो गई है। पिछले 13 वर्षों से राज्य सचिवालय के रूप में कार्यरत नबान्न की जगह अब ऐतिहासिक राइटर्स बिल्डिंग को फिर से सत्ता का केंद्र बनाने की योजना सामने आई है। भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव में जीत के बाद सरकार का संचालन हावड़ा स्थित नबान्न से हटाकर कोलकाता के डलहौजी स्क्वायर स्थित राइटर्स बिल्डिंग से करने का संकेत दिया है।

राइटर्स बिल्डिंग फाइल फोटो

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने बुधवार को नबान्न में कार्यवाहक मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला से मुलाकात कर प्रस्तावित बदलाव की जानकारी दी। बताया जा रहा है कि नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण के बाद सचिवालय को चरणबद्ध तरीके से राइटर्स बिल्डिंग में स्थानांतरित किया जाएगा। हालांकि भाजपा ने अभी तक मुख्यमंत्री पद के चेहरे की घोषणा नहीं की है, लेकिन शनिवार सुबह ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ ग्रहण समारोह होने की संभावना जताई जा रही है।

भाजपा लंबे समय से राइटर्स बिल्डिंग को पश्चिम बंगाल की प्रशासनिक और ऐतिहासिक पहचान मानते हुए सचिवालय को वहां वापस ले जाने की पक्षधर रही है। प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी 2021 से ही राइटर्स बिल्डिंग से सरकार चलाने की बात करती रही है और चुनाव प्रचार के दौरान भी इसकी घोषणा की गई थी। हालांकि अंतिम निर्णय नए मुख्यमंत्री द्वारा लिया जाएगा।

करीब ढाई सौ वर्षों तक राइटर्स बिल्डिंग बंगाल और बाद में पश्चिम बंगाल की सत्ता का प्रमुख केंद्र रही है। पहले यहां से ईस्ट इंडिया कंपनी का प्रशासन संचालित हुआ, फिर ब्रिटिश शासनकाल में यह प्रशासनिक गतिविधियों का मुख्यालय बना रहा। स्वतंत्रता के बाद अक्टूबर 2013 तक पश्चिम Bengal सरकार भी इसी इमारत से संचालित होती रही।

वर्ष 2011 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद ममता बनर्जी ने भी राइटर्स बिल्डिंग से कार्यभार संभाला था, लेकिन बाद में सुरक्षा कारणों और भवन की जर्जर स्थिति का हवाला देते हुए सचिवालय को अस्थायी रूप से हावड़ा स्थित नबान्न में स्थानांतरित कर दिया गया। राज्य सरकार ने भवन के जीर्णोद्धार और आधुनिकीकरण के लिए करीब 200 करोड़ रुपये आवंटित किए थे। उस समय ममता बनर्जी ने भवन को “बारूद का ढेर” बताते हुए तत्काल वैकल्पिक स्थान की जरूरत जताई थी।

नवीनीकरण कार्य के तहत लोक निर्माण विभाग ने भवन के बीच बने दो एनेक्सी ब्लॉकों को ध्वस्त किया, जिससे मूल तीन लाख वर्गफुट कार्यक्षेत्र घटकर लगभग ढाई लाख वर्गफुट रह गया। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री कार्यालय समेत 8 से 10 विभागों के संचालन के लिए यह स्थान पर्याप्त है।

पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के अनुसार, यदि नई सरकार तत्काल राइटर्स बिल्डिंग लौटना चाहती है तो फिलहाल ब्लॉक-1 और ब्लॉक-2 उपयोग के लिए तैयार हैं। दूसरी मंजिल पर मुख्यमंत्री कार्यालय के लिए आवश्यक मरम्मत और नवीनीकरण का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि पहली मंजिल पर मूल सीएमओ की मरम्मत में अभी लगभग छह माह और लग सकते हैं।

इसी बीच, कोलकाता पुलिस आयुक्त अजय नंद ने बुधवार को राइटर्स बिल्डिंग का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था और भवन की तैयारियों का निरीक्षण किया। इससे साफ संकेत मिल रहा है कि प्रशासनिक स्तर पर भी इस बदलाव को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं।

गौरतलब है कि राइटर्स बिल्डिंग का निर्माण वर्ष 1777 में हुआ था। इसे ब्रिटिश वास्तुकार थॉमस लियोन ने डिजाइन किया था और इसका निर्माण गवर्नर जनरल वॉरेन हेस्टिंग्स के कार्यकाल में कराया गया। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से तीन वर्ष पहले ईस्ट इंडिया कंपनी ने इसे अपने नियंत्रण में लिया और यहां क्लर्कों के कार्यालय स्थापित किए गए। वर्ष 1906 के आसपास भवन को वर्तमान ग्रीको-रोमन शैली का स्वरूप मिला, जिसने इसे कोलकाता की सबसे प्रतिष्ठित औपनिवेशिक इमारतों में शामिल कर दिया।

इतिहास, विरासत और प्रशासनिक महत्व का प्रतीक रही राइटर्स बिल्डिंग अब एक बार फिर पश्चिम बंगाल की सत्ता का केंद्र बनने की दहलीज पर खड़ी है। हालांकि इसके लिए भवन के अधूरे नवीनीकरण कार्य और सुरक्षा मानकों को लेकर कई चुनौतियां अभी बाकी हैं।

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