*प्रभात खबर में एक खबर लिखा, जेल जाते ही बीमार क्यों हो जाते हैं नेता? 21जून 2004 को प्रकाशित इस खबर को जब रांची उच्च न्यायालय के तत्कालीन जस्टिस एम वाई इकवाल ने पढ़ा और फुरकान अंसारी का वेल पिटिशन सुनवाई किया तो उन्होंने फुरकान अंसारी का वेल पिटिशन रिजक्ट करते हुए लिखा कि Yesterday I read a new in* *Prabhat khabar, that when any leaders go to jail. They become ill Why? Jail is make for only Poor persons.*
फुरकान जी कहने लगे आपकी खबर ने मेरा वेल हाईकोर्ट में रिजक्ट करा दिया पल्लव जी। आपकी छपी खबर को मेरे वेल पिटिशन में लिख दिया गया है।
*खबर में ताकत सब दिन है। यह निर्भर करता है कि लिखने वाला कैसा है, और उसकी मंशा साफ है कि नहीं?*
प्रभात खबर में एक खबर लिखा, जेल जाते ही बीमार क्यों हो जाते हैं नेता?