शपथ ग्रहण समारोह में पीएम मोदी से विशेष मुलाकात का वीडियो वायरल, राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल
कोलकाता, (सा.सं.)।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत के बाद अब अभिनेता और भाजपा नेता मिथुन चक्रवर्ती एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद जहां पार्टी के कई नेताओं और रणनीतिकारों की भूमिका पर चर्चा हो रही है, वहीं सबसे अधिक सुर्खियां ‘दादा’ के नाम से मशहूर मिथुन चक्रवर्ती बटोर रहे हैं।
मुख्यमंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मिथुन चक्रवर्ती के बीच मंच पर हुई आत्मीय मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में नए संकेत दिए हैं। समारोह के दौरान दोनों नेताओं के बीच लंबी बातचीत और सहज संवाद को भाजपा नेतृत्व द्वारा मिथुन के योगदान की खुली स्वीकार्यता के रूप में देखा जा रहा है। इस मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और भाजपा समर्थकों के बीच खासा उत्साह देखा जा रहा है।

मंच पर दिखा सम्मान और आत्मीयता
शपथ ग्रहण समारोह में जैसे ही मिथुन चक्रवर्ती मंच पर पहुंचे, वहां मौजूद भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात के दौरान मिथुन ने सम्मान स्वरूप उनके पैर छूने की कोशिश की, लेकिन राजनाथ सिंह ने उन्हें रोककर गले लगा लिया। वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मिथुन को आत्मीयता के साथ गले लगाकर उनका अभिवादन किया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल औपचारिक शिष्टाचार नहीं था, बल्कि भाजपा नेतृत्व की ओर से मिथुन चक्रवर्ती को सार्वजनिक सम्मान देने का प्रतीकात्मक संदेश भी था। बंगाल चुनाव के दौरान उनकी सक्रियता और जनसंपर्क अभियान को पार्टी की बड़ी ताकत माना जा रहा है।
पर्दे के पीछे से भाजपा को दी मजबूती
वर्ष 2021 में भाजपा में शामिल होने के बाद से मिथुन चक्रवर्ती लगातार पार्टी के लिए बंगाल में सक्रिय रहे हैं। उस समय बंगाल की फिल्म इंडस्ट्री और सांस्कृतिक जगत में भाजपा के समर्थन को लेकर विरोध का माहौल माना जाता था। कई कलाकार खुलकर भाजपा के पक्ष में आने से बचते थे, लेकिन मिथुन चक्रवर्ती ने बिना किसी झिझक के पार्टी का समर्थन किया।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, मिथुन का भाजपा से जुड़ना केवल एक फिल्मी हस्ती का राजनीतिक प्रवेश नहीं था, बल्कि यह बंगाल की सांस्कृतिक और सामाजिक राजनीति में भाजपा के लिए एक बड़ा प्रतीकात्मक संदेश था। उन्होंने अपने स्टारडम और लोकप्रियता का उपयोग पार्टी को गांव-गांव तक पहुंचाने में किया।
जनता से बनाया भावनात्मक रिश्ता
मिथुन चक्रवर्ती की लोकप्रियता केवल शहरों तक सीमित नहीं रही। कोलकाता के उच्च वर्ग से लेकर सुंदरबन के मछुआरों, जंगलमहल और पुरुलिया के आदिवासी इलाकों तक उनका प्रभाव देखने को मिला। चुनावी सभाओं में उन्होंने गरीबों, वंचितों और आम बंगाली परिवारों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
उनकी शैली पारंपरिक राजनीतिक भाषणों से अलग रही। वे लोगों से सीधे संवाद करते दिखे और अपने फिल्मी अंदाज तथा सरल भाषा के कारण आम जनता के बीच तेजी से लोकप्रिय हुए। भाजपा नेताओं का मानना है कि मिथुन ने पार्टी और बंगाल की जनता के बीच भावनात्मक पुल बनाने का काम किया।
बिना पद की इच्छा के निभाई बड़ी भूमिका
भाजपा की जीत के बाद भी मिथुन चक्रवर्ती ने किसी पद या जिम्मेदारी को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई इच्छा जाहिर नहीं की है। पार्टी के लिए लगातार जमीनी स्तर पर काम करते हुए उन्होंने संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि बंगाल में भाजपा की जीत की पटकथा लिखने में मिथुन चक्रवर्ती की भूमिका बेहद अहम रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शपथ ग्रहण समारोह में व्यक्तिगत रूप से उनसे मुलाकात करना इसी योगदान की स्वीकार्यता के रूप में देखा जा रहा है।
बंगाल की राजनीति में भाजपा की इस ऐतिहासिक जीत के बाद अब यह चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले समय में मिथुन चक्रवर्ती पार्टी के लिए और भी बड़ी राजनीतिक भूमिका निभा सकते हैं।